Tuesday, June 18, 2024
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महाराणा प्रताप ओर बहलोल खान का युद्ध

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maharana pratap or bahlol khan

डरपोक अकबर ने 7 फिट 8 इंच के बहलोल खान को भेजा था , महाराणा प्रताप का सर लाने | युद्ध में कभी नहीं हारने वाला बहलोल खान अकबर का सबसे खतरनाक और ताकतवर सेनापति था |

कहा जाता है की हाथी जैसा बदन था उसका , और ताकत जोर इतना की नसे फटने को होती थी | और जालिम इतना की तीन दिन के बालक को भी गला रेत के मार देता था , जालिमवर बहलोल खान बस सर्त वो की हिन्दू का हो |

अपने पुरे जीवन में एक भी युद्ध नहीं हारा था बहलोल खान | कहा जाता है की घोड़ा भी उसके सामने छोटा लगता था , अकबर को बहलोल खान पर खूब नाज था | लूटी हुई औरत में से कुछ बहलोल खान को दे दी जाती थी |

फिर हल्दीघाटी में युद्ध हुआ , अकबर और महाराणा प्रताप की सेनाये आमने सामने थी | अकबर महाराणा प्रताप से बहोत डरता था , इसलिए वो खुद युद्ध से दूर रहा और बहलोल खान को महाराणा प्रताप से युद्ध करने भेजा |

और इसी बहलोल खान को भिडा दिया वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप से , युद्ध चल रहा था और बहलोल खान का सामना हो गया महाराणा प्रताप से , कुछ देर तक युही खेलते रहे महाराणा मुगलिया बिलाव के साथ |

और फिर गुस्से में आकर महाराणा प्रताप ने अपनी तलवार से एक ही वार में घोड़े सहित , हाथी सरीखे उस बहलोल खान का पूरा घड बिलकुल सीधी लकीर में चिर दिया |

ऐसा फाड़ा की बहलोल खान का आधा शरीर इस तरफ और आधा शरीर उस तरफ गिरा | ऐसी सौर्य का उदहारण इतिहास के कही और पन्नो में नहीं मिलता है , जो महाराणा प्रताप ने किया था | धन्य है ऐसे वीर शौर्यवान महाराणा प्रताप को |

अपने दुःखों का कारण ? | Apne Dukho Ka Karan | Buddh Story

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apne dukho ka karan ? buddh story
apne dukho ka karan ? buddh story

एक समय की बात है भगवान बुद्ध एक नगर में भ्रमण कर रहे थे | उस नगर में आम आदमी के मन में बुद्ध के विरोधीओ ने यह बात फैला दी थी की बुद्ध ढोंगी है , और हमारे धर्म को नष्ट कर रहा है |

इस वजह से उस नगर के लोग बुद्ध को दुश्मन मानते थे | जब बुद्ध को नगर में आते देखा तो नगर के लोग उसे भला बुरा और गाली देने लगे |

गौतम बुद्ध नगर के लोगो की बात बिना कुछ बोले शांति से सुनते रहे थे | जब नगर के लोग बोलते बोलते थक गए तो महात्मा बुद्ध बोले , क्षमा चाहता हु ! लेकिन अगर आप लोगो की बाते ख़त्म हो गयी हो तो मे अंदर आ जाऊ |

बुद्ध की बात सुनकर नगर के लोग सब आश्चर्यचकित हो गए | तभी वहा खडा एक आदमी बोला ओ भाई हम तुम्हारी प्रशंसा नही कर रहे , हम तुम्हे गालिया दे रहे है | क्या तुम पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है |

बुद्ध बोले चाहे आप मुझे कितनी भी गालिया दे दो , मुज पर इसका कोई असर नहीं होगा | क्युकी मे आपकी गालियो का स्वीकार ही नहीं करूँगा | इस लिए जब मे इन गालियो का स्वीकार नहीं करूँगा तो ये गालिया आपके पास ही रहेगी |

बुद्ध का ये विचार हमारे जीवन मे बहोत कुछ बदलाव ला सकता है | क्युकी , बहोत से लोग अपने दुःखो कारण दुसरो को मानते है | लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं होता , ये सब हमारे कर्म और हम पर निर्भर होता है | और हम सब Negative  बात अपने ऊपर ले लेते है |

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जब अकबर ने राजपूत वीरांगना किरणदेवी के पैरो में मांगी प्राणो की भीख

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kirandevi or akbar ki kahavi
kirandevi or akbar ki kahavi

अकबर की महानता का गुणगान तो कही इतिहास कारो ने दिया है , लेकिन अकबर की नीच हरकतो का वर्णन बहुत कम इतिहासकारो ने दिया है |

हर वर्ष अकबर अपने गंदे इरादो से दिल्ली में नौरोज का मेला आयोजित करता था , जिस मेले में पुरुषो के आने पर प्रवेश निषेध था । सिर्फ महिलाओ के लिए मेला रचता था , और खुद महिलाओ के वेश में सुन्दर स्त्रीओ को देखने जाता था | और जो सुन्दर स्त्री पर मोहित होता था उसे चल कपट से दासियो द्वारा अपने महेल कक्ष में बुलाता था |

एक दिन नौरोज के मेले की सजावट देखने महाराणा प्रताप के भाई शक्तिसिह की बेटी किरणदेवी आयी | जिनका विवाह बीकानेर के पृथ्वीराजजी से हुआ था |(Kirandevi) किरणदेवी के रूप को देखकर अकबर मोहित हो गया और अपने आप पर काबू नहीं कर पाया | और अकबरने किरणदेवी को उनकी दासियो के द्वारा अपने महेल कक्ष में बुलाया |

अपने अभिमान और कामना से वश होकर , जैसे ही (Akbar) अकबर ने किरणदेवी को स्पर्श करने की कोशिश की , तब  किरणदेवी ने कमर से कटार निकाली ,और अकबर को निचे पटका कर उनकी छाती पर पैर रख कर कटार उसके गर्दन पर लगा दी | और कहा नीच ,,, नराधम तुजे पता नहीं में कौन हु , में उन महाराणा प्रताप की भतीजी हु जिनका नाम सुनते ही तुजे नींद नहीं आती थी । बोल तेरी आखरी इच्छा क्या है |

अकबर को पसीना आ गया और खून सुख गया , उन्हों ने कभी ऐसा नहीं सोचा होगा की आज एक सम्राट राजपूत बाईसा के चरणों मे होगा | जिंदगी के लिए गिड़गिड़ाता हुवा अकबर बोला मुझे माफ़ करदो देवी मुझे आपको पहचानने मे भूल हो गयी | तब किरणदेवी ने कहा तो बोल आज के बाद दिल्ली मे कोई नौरोज का मेला नहीं लगेगा , और किसी भी नारी को परेशान नहीं करेगा |

अकबर ने हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी और वचन दिया की आज के बाद दिल्ली मे कोई नौरोज मेला नहीं लगेगा | ओर मे किसी भी नारी को बुरी नजर से नहीं देखूँगा | उसकेबाद दिल्ली मे कभी भी कोई नौरोज मेला नहीं लगा |

इस घटना का वर्णन गिरधर आसिया द्वारा रासित सगत रासो मे पोस्ट संख्या 632 मे दिया गया है | जो आज भी बीकानेर के संग्रालय मे पेंटिंग लगी है जिसमे दुहा के माध्यम से बताया गया है की

किरण सिंहणी सी चढी उर पर खींच कटार |
भीख मांगता प्राण की अकबर हाथ पसार |
धन्य है ऐसी वीरांगना किरणदेवी बाईसा को जिसने अकबर जैसे नराधम को पैरो में गिरा दिया |

बिना जाने किसी व्यक्ति के बारे में कोई राय नहीं देनी चाहिए | Buddha Moral Story

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gautam buddha moral story in hindi

गौतम बुध्द का एक खास शिष्य धम्माराम आश्रम में अपना काम करता और काम पूरा होने के बाद एकांत में चला जाता था , धम्माराम किसीसे ज्यादा बात चित नहीं करता था |

जब धम्माराम एकांत में ज्यादा रहने लगा तो आश्रम के अन्य शिष्यों को लगा की धम्माराम घमंडी हो गया है | आश्रम के अन्य शिष्यो ने बुद्ध से धम्माराम की शिकायते करनी शुरू कर दी |

एक दिन गौतम बुद्धने धम्माराम से आश्रम के सभी शिष्यों के सामने पूछा | की धम्माराम ” तुम ऐसा क्यों करते हो “? अन्य शिष्यों से अलग क्यों रेहते हो |

धम्माराम ने बुद्ध से कहा : प्रभु आपने तो कहा है की आप कुछ दिनो मे ये संसार छोडने वाले है | तो मैंने ये सोचा की जब आप संसार से चले जायेगे तो हमारे लिए सिखने को क्या रहेगा ?|

इस लिए मैंने ये तेय कर लिया है की जब तक आप है तब तक मे एकांत और मौन को समझ लू और ठीक से सिख लू | ये दो नेक काम मे आपके जीते जी करना चाहता हु |

बुद्ध ने आश्रम के अन्य शिष्यों कहा : तुम सभी ने देखा कुछ और समजा कुछ | तुम्हारी ये आदत है की तुम दुसरो की बुराई करते हो , इसलिए तुम सभी ने धम्माराम की अच्छी बात को गलत रूप मे लिया | जो बीना जाने ठीक नहीं है |

बुद्ध की सिख : हमे किसी भी व्यक्ति को ठीक से जाने बिना उसके बारे मे कोई भी राय नहीं देनी चाहिए |

 

होलिका का दहन क्यों किया जाता है ? | Holika Dahan History

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होलिका का दहन क्यों किया जाता है ? | Holika Dahan History

हम सभी भारत वासी हर साल होली दहन का त्यौहार मनाते है | लेकिन होलिका का दहन क्यों किया जाता है? उसके बारे में विस्तार से जानते है |

त्रेता युग में एक महान तपस्वी और एक ताकतवर दानव राजा था , जिसका नाम था हिरण्यकश्यप | और उनकी एक बहन थी , जिसका नाम था होलिका | हिरण्यकश्यप ने भगवान की कठोर तपस्या की और भगवान् ब्रह्माजी प्रगट हुवे और वर मांगने को कहा |

हिरण्यकश्यप ने ऐसा वर माँगा की हे प्रभु मुझे ऐसा वर दीजिये की मेरी मृत्यु हि ना हो , ना में दिन में मरू ना में रत में मरू , ना में नर से मरू ना में पशु से मरू , ना में खाते मरू ना में पीते मरू , आ में अस्त्र से मरू ना में शस्त्र से मरू , ना में सोते मरू ना में जागते मरू , ना में देवो से मरू ना में दानवोंसे मरू हे प्रभु मेरी मृत्यु किसीसे ना हो , ब्रह्माजीने कहा तथास्तु |

हिरण्यकश्यप को मारना लगभग असंभव था, इसलिए हिरण्यकश्यप अभिमारी और अत्याचारी हो गया | वे पृथ्वी लोक में कहने लगा की में ही भगवान् हु , आज से सभी लोग मेरी ही पूजा करेंगे | उसने भगवान की पूजा बंद करवाके अपनी पूजा शुरू करवाई , अब पृथ्वी लोक में हाहाकार मच गया और उसका पाप बढ़ने लगा |

हिरण्यकश्यप का एक पुत्र था जिसका नाम था प्रह्लाद , बचपन से ही प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था , और हिरण्यकश्यप भगवान् विष्णु का कट्टर दुश्मन , हिरण्यकश्यप ने कही बार प्रह्लाद को समझाया की ये पृथवी लोक में मेही भगवान् हु , सभी लोक मेरी ही पूजा करते है | प्रह्लाद को कही बार कही प्रलोभन देकर समझाया लेकिन प्रह्लाद भगवान् विष्णु की भक्ति में ही लीन रहता था |

हिरण्यकश्यप ने कही बार प्रह्लाद को मारने का प्रयत्न किया लेकिन ईश्वर क्रिपा से वो बार बार जीवित रह जाता था | फिर हिरण्यकश्यप ने उसकी बहन होलिका को ये बात बताई , होलिका ने कहा महाराज आप प्रह्लाद को मुझे सोप दीजिये | मुझे भगवन ब्रह्माजी का वरदान है की में अग्निमे नहीं जलूँगी | में अग्नि चीता में प्रह्लाद को गोदमे लिए बेठुंगी और को अग्नि में ही प्रह्लाद को भस्म करदूंगी |

ये बात सारे राज में फेल गई , दूसरे दिन बड़ी चीता बनाई होलिका प्रह्लाद को गोद में लिए बैठ गई और अग्नि परीक्षा का आदेश दिया | अग्नि ने प्रकट होते ही धीरे धीरे विकराल रूप ले लिया , प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में ही लीन था , कुछ देर बार होलिका चिल्लाने लगी की में जल रही हु में जल रही हु मुझे बचाओ और उसने भगवान ब्रह्माजी का स्मरण किया और कहा मुझे अग्नि में नहीं जलने का अपने वरदान दिया था |

ब्रह्माजी प्रकट हुवे और कहा हे होलिका मेने ये शक्ति तुम्हे अपनी रक्षा और समाज कल्याण हेतु दिया था | लेकिन तूने इसका दूर उपयोग किया इसलिए ये तुम्हे ये शक्ति कोई काम नहीं आएगी | अंत में होलिका अग्नि में भस्म हो गई और प्रह्लाद की जय जय कार हुई | और आशूरी शक्ति का नाश हो गया |

तभी से ये तिथि के दिन हमारी पौराणिक कथा और परंपरा के अनुशार हम सभी देशवासी होलिका दहन करते है | और मान्यता अनुशार हमारे घर में से होली को बहार निकालते है |

दुनिया का पहला कंप्यूटर | World’s First Computer

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दुनिया का पहला कंप्यूटर (Computer)

पहला डिजिटल कंप्यूटर 1642 में ब्लेज पास्कल द्वारा बनाया गया था। इसे “पैस्कलिन” भी कहा जाता था और यह यांत्रिक गणना करने वाला एक सरल उपकरण था। फिर मैकेनिकल कंप्यूटर 1822 में Charles Babbage ने बनाया | लेकिन इसका डिजाइन मौजूदा कंप्यूटर्स के तरह बिलकुल नहीं दिखता था |

पहला मैकेनिकल कंप्यूटर (Computer)

फिर साल 1837 में, चार्ल्स बैबेज ( Charles Babbage ) ने पहला जनरल मैकेनिकल कंप्यूटर,जिसका नाम उन्होंने analytical engine सोचा था , फिर इसका नाम Analytical Engine रखा गया | फिर धीरे धीरे नयी तकनीक  और नए नए संशोधकों ने बदलाव करके नयी तरह से डिज़ाइन किया |

और फिर बैबेज general mechanical computer की description सोची | और धीरे धीरे उसमे बदलाव होना शुरू हुआ |

पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर (Computer Evolution)

पउसके बाद इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर 1946 में जॉन माउचली और जे. प्रेसर एकर्ट द्वारा बनाया गया था। इसे “ENIAC” (इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर) कहा जाता था और यह वैज्ञानिक गणनाओं के लिए उपयोग किया जाने वाला एक विशाल मशीन था। तब उसे कंप्यूटर की जगह अलग अलग नाम से जाना जाता था |

पहला Programmable Computer किसने बनाया 

सन 1938 में, German Civil Engineer , Konrad Zuse ने दुनिया का पहला freely programmable binary driven mechanical computer का आविष्कार किया था।

उन्होंने इसका नाम Z1 रखा था। Konrad Zuse को बहुत लोग Modern Computer का जनक भी मानते हैं। Z1 का असली नाम था “V1” for VersuchsModell 1, लेकिन World War 2 के बाद इसे Rename कर दिया गया और “Z1″ रखा । इसमें करीब 1000 kg weight की पतली metal sheets का इस्तमाल किया गया वो भी 20000 parts के साथ।

यहां कुछ अन्य महत्वपूर्ण योगदानकर्ताओ ने आविष्कार किया

  • Charles Babbage : 19वीं शताब्दी में “एनालिटिकल इंजन” डिजाइन किया, जिसे पहला प्रोग्रामेबल कंप्यूटर माना जाता है।
  • Ada Lovelace: “एनालिटिकल इंजन” चलने के लिए पहला एल्गोरिदम लिखा, जिसे पहली प्रोग्रामर माना जाता है।
  • John von Neumann: “वॉन न्यूमैन आर्किटेक्चर” विकसित किया, जो आधुनिक कंप्यूटरों का आधार भी माना जाता है।

यहां कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं है

  • 1642: ब्लेज पास्कल ने “पास्कलिन” नामक यांत्रिक कैलकुलेटर बनाया, जो जोड़ और घटाव कर सकता था।
  • 1673: गॉटफ्रीड विल्हेम लाइबनिज ने “莱布尼茨 का कैलकुलेटर” बनाया, जो गुणा और भाग भी कर सकता था।
  • 1804: जोसेफ मारी जैकर्ड ने “जैकर्ड लूम” बनाया, जो पंच कार्ड का उपयोग करके पैटर्न बुनाई कर सकता था।
  • 1943: अंग्रेजों ने Colossus नामक पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर बनाया, जो जर्मन एनिग्मा कोड को तोड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
  • 1946: जॉन माउचली और जे. प्रेसर एकर्ट ने ENIAC नामक पहला इलेक्ट्रॉनिक सामान्य-उद्देश्य कंप्यूटर बनाया।

AI क्या है ? | AI कैसे काम करता है (Artificial intelligence)

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AI कैसे काम करता है | How Do It works AI Technology

AI, (Artificial intelligence) एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जो मशीनों को बुद्धिमान बनाने का विज्ञान और इंजीनियरिंग टेक्नोलोजी है। यह मशीनों को सीखने, समझने और तर्क करने की क्षमता प्रदान करता है,

AI का काम करने का तरीका डेटा और एल्गोरिदम पर आधारित है

1. डेटा: AI सिस्टम को काम करने के लिए डेटा की आवश्यकता होती है। यह डेटा विभिन्न रूपों में हो सकता है, जैसे कि टेक्स्ट, इमेज, वीडियो, या सेंसर रीडिंग। डेटा जितना अधिक होगा, AI सिस्टम उतना ही बेहतर सीख और प्रदर्शन कर पाएगा।

2. एल्गोरिदम: एल्गोरिदम निर्देशों का एक समूह है जो AI सिस्टम को डेटा को समझने और उससे सीखने में मदद करते हैं। विभिन्न प्रकार के एल्गोरिदम मौजूद हैं, जिनमें से प्रत्येक विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए उपयुक्त है।

AI के काम करने के मुख्य चरण:

  • डेटा संग्रह: AI सिस्टम के लिए डेटा इकट्ठा किया जाता है। यह डेटा विभिन्न स्रोतों से आ सकता है, जैसे कि इंटरनेट, सेंसर, या मानव के द्वारा लिखित।
  • डेटा प्रीप्रोसेसिंग: डेटा को AI सिस्टम द्वारा उपयोग किए जाने के लिए तैयार किया जाता है। इसमें डेटा को साफ करना, उसे व्यवस्थित करना और उसे मानकीकृत करना शामिल है।
  • मॉडल प्रशिक्षण: डेटा का उपयोग AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है। यह मॉडल डेटा में पैटर्न को पहचानना और उन पैटर्नों का उपयोग करके भविष्यवाणियां करना सीखता है।
  • मॉडल मूल्यांकन: AI मॉडल का प्रदर्शन मूल्यांकन किया जाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि मॉडल सटीक और विश्वसनीय भविष्यवाणियां कर रहा है।
  • मॉडल तैनाती: AI मॉडल को वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों में तैनात किया जाता है। यह मॉडल का उपयोग विभिन्न कार्यों को करने के लिए किया जा सकता है, जैसे कि निर्णय लेना, स्वचालन, या रचनात्मक सामग्री उत्पन्न करना।

AI के कुछ प्रमुख प्रकार

  • मशीन लर्निंग: यह AI का एक प्रकार है जो डेटा से सीखने पर केंद्रित है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम डेटा में पैटर्न को पहचानने और उन पैटर्नों का उपयोग करके भविष्यवाणियां करने में सक्षम हैं।
  • डीप लर्निंग: यह मशीन लर्निंग का एक प्रकार है जो कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क का उपयोग करता है। कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क मानव मस्तिष्क से प्रेरित होते हैं और जटिल डेटा में पैटर्न को पहचानने में सक्षम होते हैं।
  • प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP): यह AI का एक प्रकार है जो मानव भाषा को समझने और उससे बातचीत करने पर केंद्रित है। NLP का उपयोग चैटबॉट, मशीन अनुवाद, और टेक्स्ट विश्लेषण जैसे अनुप्रयोगों में किया जाता है।

AI एक तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है , जो उपयोग विभिन्न प्रकार के अनुप्रयोगों में किया जा रहा है। AI में हमारे जीवन के कई पहलुओं में क्रांति लाने की क्षमता रखता है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, और विनिर्माण जैसे सभी काम AI मशीनों के द्वारा किया जाता है |

AI (Artificial Intelligence) क्या है ?

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AI  (Artificial Intelligence) क्या है ?

AI एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता है , जिसे हिंदी में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” कहते हैं, मतलब की बनावटी (कृत्रिम) तरीके से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता. दूसरे शब्दों में कहे तो , यह मशीनों और सॉफ्टवेयर द्वारा बुद्धिमान बनाने का विज्ञान और इंजीनियरिंग तरीका है।

  • मशीन लर्निंग: मशीनों के द्वारा डेटा से सीखने और अपने आप को बेहतर बनाने की अनुमति देना ।
  • डीप लर्निंग: मशीन लर्निंग का एक सबसेट है , जो कृत्रिम न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करके जटिल पैटर्न सीखने में सक्षम करता है।
  • कंप्यूटर विजन: मशीनों , छवियों और वीडियो को समझने और उनसे जानकारी निकालने के लिए सक्षम बनाना है ।
  • प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण: मशीनों और सॉफ्टवेयर को मानवीय भाषा को समझने और उत्पन्न करने में सक्षम बनाना है ।

 AI के कुछ उदाहरण

  • स्मार्टफ़ोन पर वॉयस असिस्टेंट: यह एआई का एक रूप है , जो प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण का उपयोग करके आपकी आवाज के निर्देशों को समझता है और उसे भाषा रूपांतर और बोलने में कार्रवाई करता है।
  • सेल्फ-ड्राइविंग कारें: ये कर में सेंसर और एआई का उपयोग करके ,अपने परिवेश को समझती हैं और सड़क पर सुरक्षित रूप से नेविगेट करती हैं , और ऑटो ड्राइव करती है ।
  • ऑनलाइन स्टोरों पर प्रोडक्ट रेकमंडेशन: एआई आपके द्वारा देखे गए उत्पादों के आधार पर आपके लिए रुचिकर अन्य उत्पादों की सिफारिश करता है।
  • स्वचालित अनुवाद: एआई अनुवाद सॉफ्टवेयर एक भाषा से दूसरी भाषा में टेक्स्ट (लिखित में) भाषा अनुवाद कर सकता है और बोल सकता है ।
  • फेस रिकॉग्निशन: एआई सॉफ्टवेयर की मदद से आपके चेहरे की पहचान कर सकता है , और लोगों को पहचान सकता है।
  • सेल्फ-ड्राइविंग कारें: एआई सॉफ्टवेयर द्वारा कारों को बिना ड्राइवर के सड़कों पर चलाने में मदद कर सकता है। और कैमरों के उपयोग से अपने परिवेश को महसूस कर सकती हैं और सड़क पर नेविगेट कर सकती हैं।
  • चिकित्सा निदान: एआई के द्वारा डॉक्टरों के मशीनों सॉफ्टवेयर के माध्यम से बीमारियों का निदान करने में सहायता करता है।
  • चैटबॉट्स: ये ग्राहक की सेवा या जानकारी प्रदान करने के लिए वेबसाइटों और ऐप्स पर उपयोग किए जाने वाले कंप्यूटर प्रोग्राम होते हैं। वे मनुष्यों के साथ बातचीत कर सकते हैं और उनके सवालों का जवाब भी दे सकता हैं।
  • सेल्फ-ड्राइविंग कारें: ये कारें सेंसरों और कैमरों का उपयोग करके अपने परिवेश को महसूस कर सकती हैं और सड़क पर नेविगेट कर सकती हैं।

पूरी दुनिया में एआई AI तेजी से विकसित हो रहा है , और हमारे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इसका प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यह कई तरह के लाभ प्रदान करता है, जैसे निर्णय लेने में , रास्ते देखने में , ज़मीन के अंदर नई खोजों करना विगेरे विगेरे। हालांकि, एआई के बारे में नैतिक और सामाजिक चिंताएं भी ज्यादा हैं, जिन के नुकशान और फायदे पर भी विचार करना महत्वपूर्ण है।

कैसे बनी एक वेश्या बुद्ध की पहली शिष्या | How a prostitute became the first disciple of Buddha

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गौतम बुद्ध के समय में वैशाली राज्य में एक बहुत ही प्रसिद्ध वेश्या रहती थी | जिसका नाम था आम्रपाली वह बहुत ही सुंदर थी और राजाने उसे नगरवधू घोषित कर दिया गया था  | यानी कि पूरे शहर की पत्नी | उसके महल के द्वार पर सदा सोने के रथ खड़े रहते थे , यहां तक कि महान राजाओं को भी उससे मिलने के लिए इंतजार करना पड़ता था  | 

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वह केवल एक वेश्या थी , लेकिन इतनी अमीर हो गई थी कि वह राज्य खरीद सकती थी | आम्रपाली का शरीर जितना सुंदर था उससे कहीं सुंदर उसकी आत्मा थी ,जो सच्चे प्यार के लिए तरसती थी | क्युकी आम्रपाली खुद से वेश्या नहीं बनी थी उसे जबरदस्ती राजा ने वेश्या बनाया था | 
आम्रपाली के वेश्या बनने के पीछे एक कहानी है ,आम्रपाली अपने ग्राहकों को बहुत प्यार करने का दिखावा करती थी | क्योंकि उसे इसके लिए भुगतान किया जाता था , लेकिन अंदर से वह उन सब से नफरत करती थी | क्योंकि वह सभी उसका इस्तेमाल एक भोग की वस्तु के रूप में करते थे ,एक इंसान के रूप में उसका सम्मान कोई नहीं करता था | 
  • बौद्ध भिक्षु की आध्यात्मिक कहानी | buddh bhikshu spiritual story
1 दिन आम्रपाली अपने महल की बालकनी में खड़ी थी | अचानक उसने महल के सामने से एक युवा बौद्ध भिक्षु को गुजरते हुए देखा ,जिसके पास कुछ भी नहीं था |  सिवाय एक भिक्षा पात्र के , लेकिन उसके पास जबरदस्त जागरूकता थी ,और लोगों को खुद की ओर आकर्षित करने की अद्भुत शक्ति थी | जब युवा बौद्ध भिक्षुओं ने ऊपर की तरफ देखा तो आम्रपाली उसे देख रही थी | युवा भिक्षु  ने आम्रपाली की ओर देखते हुए बेहद सम्मान भाव के साथ आम्रपाली को प्रणाम किया ,आम्रपाली एक तक उस युवा भिक्षु को देखती रही |क्योंकि पहली बार किसी ने आम्रपाली को सम्मान की नजरों से देखा था | किसी ने पहली बार उसे इंसान होने का एहसास दिलाया था |
आम्रपाली तुरंत सीढ़ियों से नीचे उतरी ,और बाहर आकर उस युवा बौद्ध भिक्षु के पैर छुए और कहा प्रभु कृपया आज के दिन आप मेरे मेंहमान बने | और मेरे महल में चलकर भोजन स्वीकार करें ,इसके बाद आम्रपाली ने कहा कृपया मेरे निमंत्रण को ना ना करें ,क्योंकि पहली बार मैंने किसी को निमंत्रण दिया है | मुझे हजारों बार राजाओ और सम्राटो  द्वारा आमंत्रित किया गया है  |लेकिन मैंने कभी किसी को आमंत्रित नहीं किया है ,यह मेरा पहला निमंत्रण है ,युवा भिक्षु ने सम्मान पूर्वक आम्रपाली का निमंत्रण स्वीकार करते हुए भोजन ग्रहण किया |
भोजन देने के बाद आम्रपाली ने कहा प्रभु आज से 3 दिनों के बाद बारिश का मौसम शुरू होने वाला है |जो कि 4 महीनों तक रहेगा और मैं आपको अपने घर में 4 महीने रहने के लिए आमंत्रित करती हूं |आने वाले 4 महीनों के लिए यह महल आपका आश्रय होगा ,मैं आपको पूर्ण रूप से आश्वस्त करती हूं ,कि मैं किसी भी प्रकार से आपके ध्यान में बाधा नहीं बनूंगी | बल्कि जितना मुझसे हो सकेगा आपके ध्यान की सुविधाओं को सुगम बनाने का प्रयास करूंगी |
युवा बौद्ध भिक्षुओं ने कहा कि माफ कीजिएगा देवी ,लेकिन इस विषय में मैं स्वयं निर्णय नहीं ले सकता | मैं आप के प्रस्ताव के विषय में बुध से पूछ लूंगा ,अगर वह मुझे अनुमति देंगे तो मैं आपके महल में आश्रय अवश्य स्वीकार कर लूंगा | इतना कहकर वह बौद्ध भिक्षु वहां से चला गया | इससे पहले कि वह भिक्षु बौद्ध  के पास पहुंचता और आम्रपाली के प्रस्ताव के बारे में कुछ बताता ,उससे पहले वहां पर मौजूद अन्य भिक्षु बुद्ध  के पास पहुंच गए और बुध से कहा ,आप उस युवा भिक्षु को रोकयेगा आम्रपाली ने उसे 4 महीने रहने के लिए अपने घर पर बुलाया है | आम्रपाली एक वेश्या है और एक भिक्षु एक वेश्या के घर में 4 महीने रहे यह सही नहीं ,है इससे हमारे संग में गलत संदेश फेल जाएगा |
बुद्ध ने कहा कृपया आप लोग शांत हो जाएं और उस भिक्षु की आने की प्रतीक्षा करें | थोड़ी देर बाद वह युवा भिक्षु बुध के  पास आया उसने आते ही बुद्ध के पैर छुए और उन्हें पूरी कहानी सुनाते हुए कहा की बुध , नगर की एक आम्रपाली नाम की महिला ने मुझे बारिश के 4 महीने अपने घर पर रहने के लिए आमंत्रित किया है | मैंने उसके निमंत्रण का भी कोई जवाब नहीं दिया  , मैंने उससे कहा है कि अगर आप मुझे उसके घर पर रहने की आज्ञा देंगे तभी मैं उसके घर पर रहने के लिए जाऊंगा  | अतह  बुद्ध आप जो कहें मैं वही करूंगा |
उस युवा भिक्षु ने आम्रपाली के विषय में वेश्या शब्द का प्रयोग ना करते हुए ,केवल महिला शब्द का प्रयोग किया |  बुद्ध ने उस युवा भिक्षु की आंखों में देखा ,और कहा तुम रह सकते हो | तभी अचानक एक बूढ़ा भिक्षु खड़ा हुआ और बोला कि बुद्ध यह सही नहीं है , यह यूवा भिक्षु एक सच्चाई छुपा रहा है ,इसका कहना है कि एक आम्रपाली नाम की महिला ने अपने घर पर रहने के लिए इसे आमंत्रित किया है | लेकिन वह एक महिला नहीं है वह एक वेश्या है |
बुद्ध ने कहा कि मैं जानता हूं , क्योंकि इसने वेश्या शब्द का प्रयोग नहीं किया है | इसका अर्थ है कि उसके मन में उसके लिए सम्मान का भाव है | इसीलिए मैं इसको वहां रहने की अनुमति दे रहा हूं | वहां मौजूद हजारों भिक्षुओ को विश्वास नहीं हो रहा था कि बुद्ध ने एक युवा भिक्षु को एक वेश्या के घर में रहने की अनुमति दे दी है |अगले 3 दिनों के बाद युवा भिक्षु आम्रपाली के घर रहने के लिए चला गया |
उसके जाते ही वहां पर उपस्थित अन्य भिक्षु उसके विषय में तरह-तरह की बातें बनाने लगे , बुद्ध ने सभी को शांत करते हुए कहा मुझे मुज ऊपर विश्वास है ,मैंने उसकी आंखों में देखा है कि उसके भीतर तनिक भी भोग की इच्छा नहीं थी ,अगर उस भिक्षु का ध्यान गहरा है तो वह आम्रपाली के हृदय को परिवर्तित कर देगा | और अगर भिक्षु का ध्यान गहरा नहीं है तो आम्रपाली अपने शारीरिक आकर्षण से भिक्षु को परिवर्तित कर देगी | 
यह एक प्रश्न है ध्यान और शारीरिक आकर्षण का जिसका उत्तर हमें 4 महीने के बाद मिलेगा | बुध की बात सुनकर वहां पर उपस्थित भिक्षुओं ने कहा कि बुद्ध उस युवा भिक्षु पर बहुत अधिक भरोसा करके अनावश्यक आप जोखिम उठा रहे हैं , वह भिक्षुक युवा है और आम्रपाली बहुत सुंदर है | 
  • बुद्ध की पहेली शिष्या आम्रपाली  | buddha ki paheli shishya amrapali
समय प्रारंभ हुआ और वर्षा ऋतु के 4 महीने बीत गए | वह युवा भिक्षु  वापस आ गया ,उसने आते ही बुद्ध के पैर छुए और उसी युवा भिक्षु के पीछे आम्रपाली भी आई हुई थी |उस युवा भिक्षुक ने अमरपाली का बुध से परिचय कराते हुए कहा बुद्ध ये आम्रपाली है और यह आप से दीक्षित होना चाहती है | यह एक अनोखी महिला है यह ना केवल सुंदर है बल्कि इसकी आत्मा भी उतनी ही शुद्ध है ,जितनी आप कल्पना कर सकते हैं |अम्रपाली ने बुद्ध के पैर छुए और कहा मैं पहली बार देखने भर से इस  युवा भिक्षु  से प्रेम करने लगी थी | इसीलिए मैंने  अपने सौंदर्य से कई बार इसे आकर्षित करने का प्रयास किया ,लेकिन मैं पूर्ण रूप से असफल रही |
इसके बजाय इस युवा भिक्षु ने मुझे ध्यान के प्रति जागरुक किया | और एहसास कराया कि वास्तविक जीवन भोग नहीं परंतु ध्यान है | इसीलिए बुद्ध मे अपनी सारी संपत्ति आपके शिष्यों को दान में देना चाहती हूं ,और शेष जीवन ध्यान में बिताना चाहती हूं | 
इसके बाद आम्रपाली बुध के शिष्यों में पहली महिला हुई जिन्हें आत्मज्ञान की प्राप्ति हुई | बुद्ध ने अपने पंथ के सभी शिक्षकों से कहा यदि तुम वेश्याओं की संगति से डरते हो | तो उस डरका  उस वेश्या से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि वह डर तुम्हारे बेसुध मन की उपज है ,क्योंकि तुमने अपनी कामुकता को दबा दिया है | और काम ऊर्जा को दबाया नहीं जा शकता , इसको केवल रूपांतरित किया जा सकता है |
दोस्तों हम सभी अपनी कामवासना को खत्म करने के लिए उसका दमन करना चाहते हैं , उसको दबाना चाहते हैं | लेकिन कामवासना एक ऊर्जा होती है , एक एनर्जी का सोर्स होता है | एनर्जी कभी भी खत्म नहीं हो सकती है बल्कि वह रूपांतरित हो सकती है | अगर आप अपनी कामवासना की ऊर्जा शक्ति को दूसरी जगहों पर दूसरे दिशाओं में परिवर्तित करेंगे तो ही आप काम वासना से छुटकारा पा सकते हैं | 
लेकिन याद रहे कामवासना से छुटकारा पाने के बारे में हमें सोचना भी नहीं है ,हमें बस अपनी ऊर्जा को परिवर्तित करना है | वो ऊर्जा हम कहा पे लगाएंगे ? , हम उसे अपनी रचनात्मक शक्ति के लिए प्रयोग कर सकते हैं ,ध्यान के लिए प्रयोग कर सकते हैं और जैसे-जैसे हम उन ऊर्जा शक्ति को  होस से भरेंगे | तो हमारे जीवन में कामवासना से भी ज्यादा आनंद पैदा हो जाएगा | और उसके बाद कामवासना का आनंद हमें उसके सामने तुच्छ लगने लगेगा | अगर यह कहानी आपको ज्ञानवर्धक लगी तो कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं | धन्यवाद  

महात्मा की ये 10 बाते मानलों ,आप कभी दुखी नहीं होंगे

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mahatma ki 10 bate motivation story
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बहोत समय पहले की बात है , एक महात्मा किसी स्थान पर पर्णकुटीर बनाकर निवेश करते थे |

महात्मा परम दयालु शीलवान और निसप्राहि थे , महात्मा एकाग्रता के साथ ध्यान करते थे और भगवान् का भजन करते थे | तो दूसरी और अपने पास आये हुए दुखी लोगो के दुःख के निवारण भी अवश्य करते थे |

महात्माके सद्गुणों और सेवाकार्य से भगवान् बहुत प्रसन्न हुए | और भगवान् ने महात्माको वरदान देने , एक देवदूत को धरती पर भेजा | महात्माने देवदूत का ह्रदय से सत्कार किया , और देवदूत से आने का कारण पूछा |

देवदूतने महात्मासे कहा की हे महात्मा भगवान् आपकी भक्ति और सेवा कार्य से अति प्रसन्न है | इस लिए वे आपको वरदान में कोई दिव्य शक्ति देना चाहते है | उन्होंने मुझे आपके पास यह कहने के लिए भेजा है की , क्या आप लोगो की रोग मुक्त करनेकी शक्ति प्राप्त करना चाहेंगे |

महात्माने विनम्र उत्तर दिया , की हे देव भगवान मुज पर प्रसन्न है यही मेरे लिए सबसे बड़ा वरदान है | मुझे कोई दिव्य शक्ति नहीं चाहिए में , परमेश्वर के विधान में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहता हु |

जब महात्माने रोग मुक्त शक्ति लेने से मना कर दिया , तो देवदूत ने कहा की तो आप दुष्टोंको सदमार्ग पर लाने की शक्ति ग्रहण करे | महात्माने पुनः विनम्रता से मना करते हुए कहा की , पापीओ को सदमार्ग पे लाना आप जैसे देवदूत का काम है | देवदूत बड़े आतचर्य में पड़ गए , की क्यों महात्मा ने इन शक्तिओं को लेने से मना कर दिया |

देवदूत महात्माकी भक्ति भावना और अनाशक्ति से बड़े प्रसन्न हुए | उन्होंने महात्मासे कहा हे महात्मा आपने तो मुझे बड़े संकट में डाल दिया है , ईश्वर की आज्ञा अनुसार में आपको कोई शक्ति दिए बिना स्वर्ग नहीं लोट शकता , कृपया आप कोई शक्ति अवश्य स्वीकार कीजिये |

महात्मा कुछ देर तक विचारमंद रहे , फिर उन्होंने देवदुत से कहा ठीक है अगर आप मुझे शक्ति देना ही चाहते है , तो ये वरदान दीजिये की भगवान जो भी मुझसे शुभ कर्म करवाना चाहते है , वे शुभ कर्म होते चले जाए |

में जहा से भी गुजरू वहा लोग रोग मुक्त हो जाए | देवदूत ने कहा तथास्तु ऐसाही हो और उसने महात्माकी परछाई को रोगमुक्त करनेकी शक्ति से संपन्न करदिया | फिर देवदूत वहासे चले गए |

ईधर महात्मा जहा भी जाते , वहा लोग स्वस्त और रोगमुक्त हो जाते | ना तो महात्माको ये पता चला और नाही लोगो को ये पता चलपाया की कैसे लोगो के रोग और कस्ट दूर हो जाते थे | महात्माको कभी बौद्ध नही हो पाया की वो ईश्वर के कितने करीब थे , सेवा तभी कहेलाती है जब सेवा करने वाले मनुष्यके मन में जराभी अभिमान ना रहे |

एक मशहूर कहावत है की दान करो तो ऐसे करो की अपने दूसरे हाथकोभी पता ना चले | क्युकी अभिमानी रहते सेवा संभव नही है , जो सेवा के बदले नाम की चाहत रखता है वे कभी सेवा के पात्र नही होते |

क्युकी क्रतग्यताका गुण प्रत्येक मनुष्यमे होता नही है | और प्रशंसा ना मिलने पर वो सेवा कार्य छोड़ देता है , सहानुभूति दया और उदारता के बिना सेवा संभव नहीं है |

क्युकी एक पेड़ की पहेचान उनके फल से होती है | और मनुष्य की पहेचान उनके कर्मो से , महात्मा के ये बात से हमें ये बोध लेना चाहिए की सेवा कार्य करो तो निस्वार्थ करो फल की चिंता न करो |